अब कानून व्यवस्था के बाद शिक्षा व्यस्था पर भी घिरी सूशासन सरकार

निजी चैनल के साक्षत्कार में टॉपर छात्रों की अज्ञानता भरी जवाब के बाद सरकार की फजीहत

01 Jun 2016 |  234

इंटरमीडिएट परीक्षा में टॉपर के शर्मनाक जवाब और उनके ज्ञान ने जहां बिहार के शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है हो रही है वहीँ सरकार सकते में आ गयी है.इंटर साइंस व आर्ट्स के टॉपर पर बिहार बोर्ड भी असमंजस में है। इस पर उठ रहे सवाल को गंभीरता से लेते हुए बिहार बोर्ड ने साइंस और आर्ट्स के पहले पांच टॉपरों का इंटरव्यू लेने का फैसला लिया है। इनकी लिखित परीक्षा भी होगी। जरूरत पड़ने पर उससे कॉपियों का मिलान किया जाएगा। बोर्ड अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद का कहना है कि सच्चाई का पता करने के लिए यह जरूरी है। ऐसा माना जा रहा है कि ये सारा खेल शिक्षा विभाग और निजी कॉलेज चलाने वाले गिरोहों के मिलीभगत का नतीजा है. विशुनदेव राय महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर काम कर चुके अमरेन्द्र कुमार सिंह बताते हैं कि इस कॉलेज की कॉपी, मूल्यांकन केन्द्र से दोबारा यहां लाई गई थी. यह काम बोर्ड की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता है. प्रोफेसर के मुताबिक वैशाली जिले के सभी इंटरमीडिएट स्कूल और कॉलेज की कॉपी कैमूर जिले के मूल्याकंन केन्द्रों पर भेजी गई थी, केवल विशुनदेव राय कॉलेज की कॉपी पटना के राजेन्द्र नगर स्थित स्कूल में भेजी गई थी. हालांकि बोर्ड की दलील है कि इस कॉलेज के पहले के इतिहास को देखते हुए इस पर विशेष नजर रखने के लिए इसको पटना में ही रखा गया. लेकिन अमरेन्द्र कुमार सिंह का कहना है कि पटना में इस कॉलेज से जुड़े लोगों ने सब कुछ पर्दे के पीछे से अपने हक में करवा लिया. कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर ने खोले कई राज विशुनदेव राय कॉलेज की स्थापना से 2011 तक उसी कॉलेज में प्रोफेसर रहने वाले अमरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि कॉलेज में पढ़ाई लिखाई की कोई सुविधा नहीं है, बल्कि पैसे के हिसाब से ग्रेडिंग होती है जितना पैसा दो उतना नंबर पाओ. इसके लिए कॉलेज में ए, बी, सी, ग्रेड बने हुए हैं. इस कॉलेज में अधिकतर बाहर के छात्र पढ़ते हैं. कई छात्र कोटा या अन्य जगहों पर कोचिंग करते हैं और परीक्षा यहां से देते हैं. वहीं नंबर के आधार पर नियोजित शिक्षक के तौर पर नौकरी भी मिल जाती है इसलिए यहां छात्र अधिक से अधिक पैसा देने के लिए तैयार होते हैं. साथ में इस कॉलेज का बोर्ड में अच्छी पैठ होना भी छात्रों को आकर्षित करता है. पिछले साल इस कॉलेज के 215 छात्रों की कॉपी एक ही हैंडराइटिंग से लिखी गई थी. इस मामले की जांच बिहार बोर्ड ने की थी. जांच में मामला सही पाया गया था. इस कॉलेज को ब्लैक लिस्ट करने का प्रस्ताव भी था, लेकिन कॉलेज ने न सिर्फ मामले को मैनेज किया बल्कि फिर से अपने कॉलेज को टॉप भी कराया.

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