मथुरा हिंसा पर समाजवादी पार्टी और पुलिस के अलग-अलग राग

पुलिस ने नक्सलियों के होने की तो सपा ने बिहार और एम.पी. से आये अराजक तत्वों के होने की बात कही.

04 Jun 2016 |  120

मथुरा की व्यापक हिंसा से जहाँ पूरा देश सन्न है अब इस मुद्दे पर बयानबाजी भी शुरू हो गयी है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा में हुई हिंसा की आयुक्त स्तरीय जांच कराने का शुक्रवार को आदेश दिया। जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने का आरोप लगाया और इस घटना की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की मांग की। वही बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर मुख्यमंत्री अखिलेश को तुरंत इस्तीफा देने की मांग की है. मथुरा में गुरुवार शाम जवाहरबाग में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान पुलिस और अक्रिमणकारियों के बीच हुई झड़प में पुलिस अधीक्षक मुकुल द्विवेदी समेत 24 लोगों की मौत हो गई है। 23 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि मामले से निपटने में चूक हुई है।उन्होंने कहा, “अतिक्रमणकारियों से बातचीत के कई बार प्रयास किए गए, उन्हें चेतावनी दी गई, लेकिन जमीन खाली नहीं किया गया। इसमें चूक भी हुई है। गलती यह रही कि पुलिस वहां पूरी तैयारी के साथ नहीं गई। इसमें कई तरह के खतरे शामिल थे। किसी को नहीं पता था कि वहां कितना विस्फोटक है।” उधर जहाँ एक ओर हिंसा का मास्टरमाईंड रामवृक्ष यादव से शिवपाल यादव के संबंधों की बात हो रही है स्वयं सूबे के PWD मंत्री शिवपाल यादव ने आश्चर्य रूप से हिंसा के लिए बिहार और एमपी से आये बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया है. शिवपाल ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा, "मैं तो हमेशा अवैध कब्जे के खिलाफ रहा है और जिन लोगों ने ये काम किया है वो लोग यूपी के बाहर के अराजकतत्व है. मामले की जांच हो रही है दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की जायेगी.” जबकि दूसरी ओर पुलिस प्रशासन हथियारों की बरामदगी और हिंसा के तरीके पर घटना में नक्सलिओं के शामिल होने की सम्भावना जता रहा है.

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