मन्ने अन्दर करवाएगा क्या ताऊ?

पहले दिन शांतिमय रहा जाट आरक्षण आंदोलन

06 Jun 2016 |  201

ऑल इंडिया जाट आरक्षण संघर्ष समिति (एआईजेएएसएस) की ओर से प्रस्तावित आंदोलन रविवार को पहले दिन शांतिमय रहा. इस आंदोलन को दूसरे जाट संगठनों का साथ नसीब नहीं हो सका. आंदोलन के दौरान विभिन्न जगहों पर काफी कम लोगों की मौजूदगी रही. इसके बाद आंदोलन के तेज नहीं होने की गुंजाइश बढ़ गई है. इसी साल फरवरी में हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान इसका केंद्र माना जा रहा रोहतक इस बार शांत रहा. तब जहां 10 हजार से ज्यादा आंदोलनकारी सड़क पर उतरे थे, वहीं इस बार करीब 300 लोग ही इकट्ठा हो सके. इसके अलावा 15 जगहों पर भी एआईजेएएसएस लोगों को जुटाने में विफल रहा. रोहतक की तरह ही हिसार जिले के मय्याड में भी कम लोग जुटे. वहीं पानीपत के माडलोडा और कुरुक्षेत्र में तो आंदोलन के पहले दिन दर्जन भर लोग ही सामने आए. पानीपत में तैनात ड्यूटी मजिस्ट्रेट दलविंदर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन की अपील का लोगों पर असर हुआ है. लोगों के घर से नहीं निकलने की वजह उनकी समझदारी है. लोग जानते हैं कि हिंसक आंदोलन से हरियाणा की कितनी बदनामी होती है. रोहतक के नजदीक गांवों में पेड़ के नीचे लोग हुक्का पीते दिखे. इनमें से तमाम लोग प्रदर्शन के पक्ष में नहीं थे. पुलिस कार्रवाई का डर भी उनमें साफ दिखा. इनमें से एक बुजुर्ग जाट दिलेर सिंह ने प्रदर्शन में हिस्सा लेने के सवाल पर कहा कि अंदर कराएगो को मन्ने? ओ ताऊ ..भाया हिंसा के नाम पर जाटों को और हरियाणा को क्यूँ बदनाम करते हो? वहीँ यह समय खेती और फसल से जुड़े जरूरी काम का भी है अतः जाट किसानों ने आंदोलन-प्रदर्शन से दूरी बनाकर रखी है. यशपाल मलिक के उत्तर प्रदेश से संबंधित होने की वजह से हरियाणा के जाट उन्हें बाहरी भी मानते हैं. इस कमजोर प्रदर्शन के बावजूद मलिक ने सरकार से अपनी मांग मनवाने तक प्रदर्शन किए जाने की बात कही है.

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